Sunday, 9 December 2018


प्राणी जगत का एक विलक्षण प्राणी है – मकड़ी – भाग ३

शिरीष सप्रे 




मकड़ियों के बुने हुए कलात्मक जाले इन्हें एक दक्ष इंजिनियर प्रमाणित करते हैं | शिल्पकार के रूप में मकड़ी कीट जगत का एक अद्भुत प्राणी है | दुनिया के लगभग हर हिस्से में मकड़ियां पाई जाती हैं | सबसे छोटी मकड़ी का आकार आलपिन के ऊपरी सिरे जितना बड़ा होता है, जबकि  दक्षिण अमेरिका में पाई जानेवाली माइगेल नामक मकड़ी सात  से. मी. लम्बी होती है | इसकी टांगे करीब अठराह  से. मी. लम्बी होती है | यह विशालकाय मकड़ी छिपकली और छोटी चिड़ियाओं तक को खा जाती हैं |

मरुस्थलीय क्षेत्रों, दलदली जंगलों तक बर्फीले प्रदेशों में भयानक किस्म की जहरीली मकड़ियां पाई जाती हैं | उनमें से एक है मैक्सिकन टोरनटुला | यह छोटे-छोटे चूहों तक को खा जाती है और इसके घातक विष से मनुष्य की मृत्यु तक हो सकती है | इसी प्रकार अमेरिका में पाई जानेवाली ब्लैक विडो (काली विधवा) नामक मकड़ी इतनी जहरीली होती है कि यदि यह एक बार किसी को काट ले तो उसका बचना लगभग असंभव होता है | ब्लैक विडो के शरीर में विष बहुत कम मात्रा में बनता है |

मकडी की प्रणय क्रिया बहुत रोचक होती है | आकार में नर, मादा की अपेक्षा छोटा होता है | मादा को आकर्षित करने के लिए नर बहुत्त समय तक नृत्य करता है इसके पश्चात् नर और मादा क्रमशः जाले के एक-एक तार को एक के एक बाद खींचते जाते हैं | यह क्रम कार्य समाप्ति तक चलता रहता है फिर मादा अक्सर नर को खा जाती है | मकड़ियां दो से लेकर तीन हजार तक अंडे देती हैं | अंडों से बच्चे निकलने के बाद भूख के कारण यह एक दुसरे को खाने लगते हैं |

साधारण घरेलू मकडी को जैव वैज्ञानिक भाषा में थेरीडियोम कहा जाता है |  मकड़ियों का मुख्य भोजन कीट-पतंगे और कीडे-मकोडे है | जाला बनाकर शिकार को फसाने की कला में माहिर होने के कारण मकड़ियां आसानी से अपना पेट भर लेती हैं | कई मकड़ियां बिना खाए पिए साल डेढ़ साल तक जिन्दा रह सकती हैं | कुछ मकड़ियां घुमंतु अथवा पर्यटनप्रिय होती हैं | ये घोर आंधी में भी सहज भाव से सैंकड़ों-हजारों मील की उडान भरकर अपनी यात्रा बिना रुके तय कर लेती हैं | एक मकड़ी तो ऐसी भी होती है जो आकार में चींटी जैसी होती है और दीखती भी चींटी जैसी ही अधिकांश पक्षी मांस भक्षी पक्षियों को चींटी का मांस पसंद नहीं होता अतः इसका लाभ इसे मिल जाता है और चींटी बच जाती है | ट्रेपडोर मकड़ी के जाल में एक द्वार ऐसा होता है जिसमें से कीट, पतंगा, मक्खी, आदि अन्दर तो आ सकते हैं पर बाहर नहीं आ सकते |

मकड़ियों के जाल के तार इतने महीन होते हैं कि सैंकड़ों तारों को मिलाकर भी बाल जैसी मोटाई तैयार नहीं हो पाती | लेकिन महीन होने के बावजूद यह काफी मजबूत होते हैं | दरअसल यह जाल रहस्यों से भरे किसी पिटारे से कम आश्चर्यजनक नहीं, जिसका अस्तित्व लगभग २० करोड़ वर्षों से धरती पर बना हुआ है | इतने सालों में मकड़ी ने अपने जाले की बुनावट में जो सुधार किए हैं, उसकी कल्पनाशीलता को देखकर वैज्ञानिक तक आश्चर्य में पड गए हैं | मकड़ियों द्वारा तैयार की गई कुछ संरचनाएं ऐसी हैं कि मनुष्य के द्वारा अभियांत्रिकी के क्षेत्र में की जा रही खोजों को फीका साबित करने लायक सिद्ध हुई हैं |

 मकड़ी जाले के धागों में एक खास प्रकार का चिप-चिपा लगाती हैं, जिसके कारण जाल में फसा शिकार लाख कोशिशे करे छुट नहीं पाता, बल्कि और अधिक फसता चला जाता है | दरअसल मकड़ी का जाला एक किस्म की रेशम से  बना होता है | यह मकड़ी रेशम दुनिया में पाए जानेवाले सबसे मजबूत प्राकृतिक पदार्थों में से एक है | मकड़ी का जाल दुनिया की सबसे मजबूत चीजों में से एक है | अमेरिकी सेना इन मकड़ियों के रेशों से बुलेटप्रूफ जैकेट बनाती है | यह रेशा मनुष्य की जानकारी में आया दुनिया का अब तक का सबसे मजबूत पदार्थ है, यह स्टील से भी अधिक मजबूत और टिकाऊ है |

 यदि मकड़ी रेशे को कार्बन रेशे के साथ मिश्रित कर दिया जाए तो एक बहुत मजबूत पदार्थ बनता है, जो बहुत मुलायम भी रहता है | इस रेशे के कई उपयोग हैं | जैसे एक उपयोग तो यह है कि हड्डीयों को आपस में से जोड़ने वाले तंतु टूट जाने पर इस रेशे को वहां लगाया जा सकता है | मकड़ी का रेशा हमारे तंतुओं से २० गुना ज्यादा मजबूत है |

दरअसल अलग-अलग मकड़ियों के जालों की ताकत अलग-अलग होती है | दक्षिण अमेरिका में पाई जानेवाली एक मकड़ी ‘ब्लैक विडो’ (लैक्ट्रोडैक्स मेक्टन्स) सबसे मजबूत रेशम बनाती है | ब्लैक विडो का बनाया रेशम इतना मजबूत होता है कि इसे इसकी मूल लम्बाई से २७ प्रतिशत और खींचा जा सकता है और यह टूटता नहीं | कल्पना कीजिए कि मकड़ी के इस रेशम की मोटाई कितनी होगी | शायद ०.१ मि. मी. से भी कम, इतने पतले स्टील के तार को भी आप खींच कर सवा गुना नहीं कर पाएंगे | बाकी मकड़ियों के रेशम की ताकत इससे आधी ही होती है |

 बात इतनी ही नहीं दरअसल ब्लैक विडो दो किस्म के रेशम बनाती है | दूसरे किस्म का रेशम तो और भी असाधारण होता है | यह खींचतातो उतना नहीं है, मगर इसे तोड़ने के लिए काफी ताकत लगानी पड़ती है | हाल के अनुसंधान से पता चला है कि इसे तोड़ने के लिए जितनी ताकत लगती है, वह बुलेट प्रूफ जैकेट में प्रयुक्त होने वाले पदार्थ केवलार से भी अधिक है |

तात्पर्य यह है कि घरों में बेमतलब दिख पड़ने वाला और गन्दगी का प्रतीक मानकर साफ कर दिए जानेवाला मकडी का जाला शोधकर्ताओं के लिए रहस्य का केंद्र बिंदु बना हुआ है | नए-नए शोधों से अभी न जाने कितने रहस्यों का प्रकटीकरण होगा, किन्तु एक बात निश्चित है कि अब तक जो कुछ भी जानकारी सामने आई है वह अभियांत्रिकी के क्षेत्र में एक नई दिशा साबित हो सकती है |        
               


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