Saturday, 3 November 2018

दीपोत्सव विदेशों में शिरीष सप्रे


दीपोत्सव विदेशों में
शिरीष सप्रे

यह प्रकाश पर्व न केवल हिन्दुस्तान में बल्कि अन्य कई देशों में भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है | हां यह बात जरुर है कि पर्व मनाने का तरीका निश्चय ही हमसे कुछ भिन्न है | लेकिन वहां के यह त्यौहार भी हमारी  दीवाली की भांति ही हैं | श्रीलंका जैसा छोटा सा द्वीप दीवाली को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाता है इस त्यौहार की रात्रि को प्रत्येक घर छोटे-छोटे दीपों से सजाया जाता है और लोग पटाखे छोड़ते हैं | श्रीलंका में इस अवसर पर खांड से बनी मिठाइयां विभिन्न पशु-पक्षियों और मानव आकृतियों में बनाई जाती हैं | यहां यह दिन राष्ट्रीय अवकाश का होता है |

थाइलैंड और मलेशिया में भी दीपावली मनाई जाती है | थाइलैंड में यह क्राथोग के नाम से मनाया जाता है | इस दिन यहां के निवासी केले के पत्तों को छोटे-छोटे खंड बनाकर जल में प्रवाहित करते हैं | केले के पत्तो के इन खण्डों को ‘क्राथोग’ नाम से पुकारा जाता है, प्रत्येक खंड एक जलती हुई बत्ती एक मुद्रा और ‘धूप’ होती है| इसके अतिरिक्त वे लोग अपने घरों को रोशनी से भी सजाते हैं | मलेशिया में ज्योति पर्व राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है | वहां के लोग इस पर्व को बिलकुल भारत जैसे तौर-तरीकों से बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं | इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है | यहां के निवासी इस दिन आतिशबाजी का आनंद उठाते हैं |

सुमात्रा एवं जावा  द्वीपों में यह प्रकाश पर्व भारत के समान अक्टूबर या नवम्बर में मनाया जाता है | मलाया में भी दीपावली का पर्व मनाया जाता है | वहां ‘फानो पर्वत’ पर एक भग्न मंदिर विद्यमान है | जिसमें भगवान विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमाएं हैं | १९७६ में गुयाना ने दीपावली पर चार डाक टिकिट की एक श्रंखला जारी की थी जिसमें दीपक व लक्ष्मी के चित्र अंकित थे | वहां पर भी दीपोत्सव पर लक्ष्मी की पूजा प्राचीन काल से विद्यमान थी वहां पर लक्ष्मी पूजा का विधान है |

म्यांमार (बर्मा) में वहां के लोग इस पर्व को ( वैगिजू) नाम से नवम्बर महीने में मनाते हैं | म्यांमारवासियों में यह मान्यता है कि भगवान बुद्ध ने ज्ञान का प्रकाश पाने के बाद इसी भूमि पर अवतरण किया था | हर एक मकान को इस दिन रोशनी से सजाया जाता है और हर द्वार पर तोरण वन्दनवार लगाए जाते हैं | म्यांमार  के लोग इस दिन नए वस्त्र पहनना शुभ मानते हैं | 
 
जापानी लोग दिवाली जैसा ही पूर्व (तौरोनगाशी) नाम से मानते हैं | यहां के लोगों का अटूट विश्वास है कि इस शुभ दिन उनके पूर्वज उन्हें आशीर्वाद देने उनके घर आते हैं | अतएव पूर्वजों के आगमन की खुशी में सारे घर के लोग प्रकाश करते हैं | वहां इस पर्व का त्रिदिवसीय आयोजन किया जाता है |

चीनी लोग प्रकाश पर्व को ‘नई महुआ’ नाम से जानते हैं | चीन में इस दिन की तैयारी के लिए बहुत पहले से मकान साफ़ कर लिए जाते हैं | इस दिन विभिन्न रंगों के कागजों से मकानों को सजाया जाता है | चीनी व्यापारी भारत की तरह ही इसी दिन नए बही खाता शुरू करते हैं | ‘नई महुआ’ नामक इस पर्व के दिन चीन में राष्ट्रीय अवकाश रहता है |
  
इस तरह हम देखते हैं कि दीपावली पर्व हर देश में ख़ुशी से मनाया जाता है और उन देशों में भी दीप जलाने की परम्परा वर्षों से चली आ रही है|
    
     

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