Friday, 22 June 2018

मानवता का पाठ पढ़ाता है टूथब्रश - शिरीष सप्रे

मानवता का पाठ पढ़ाता है टूथब्रश
शिरीष सप्रे
सुबह उठकर दांत साफ करना हमको बचपन से ही सीखाया जाता है। दांत साफ करने के लिए पहले भले ही टूथब्रश सभी लोग उपयोग में न लाते हों परंतु आज ग्रामीण हो या शहरी सभी टूथब्रश का इस्तेमाल करते नजर आते हैं। टूथब्रश हमारे जीवन का इतना अभिन्न अंग बन गया है कि, यदि एक दिन सुबह हमें किसी कारणवश टूथब्रश से दांत साफ करने को ना मिले तो सारा दिन बेचैनी से गुजरता है। ऐसे इस टूथब्रश का भी अपना एक इतिहास है और इसके आविष्कार की कहानी भी बडी रोचक है। 

इंग्लैंड के वारविकशायर (शेक्सपियर का जन्म भी इसी क्षेत्र में हुआ था) में सन्‌ 1770 में दो समुदायों के बीच हुए जातीय धार्मिक दंगों जिनमें हजारों लोग मारे गए थे और यह धार्मिक विद्वेष लंबे समय तक चला। सरकार ने दंगों के जिम्मेदार एडिस को कैद कर उस पर मुकदमा चलाया और जेल भेज दिया। जेल जीवन के एकांत में इसे अपने किए पर प्रायश्चित होने लगा और उसने निश्चय किया कि वह अपने द्वारा फैलाए गए धार्मिक विद्वेष को समाप्त करने में ही अपना बचा हुआ समय लगाएगा। इसी सोच के दौरान उसके हाथ से टूथब्रश बन गया।

हुआ कुछ यूं कि उसने देखा कि प्रतिदिन कैदी सुबहसबेरे मुंह धोने के दौरान दांतों को मिट्टी, दातून आदि से रगडते हैं और इस दौरान उनके मसूडों से खून बहने लगता है एवं कई बार तो मसूडे भी फूल जाते हैं। एडिस सोचने लगा कि इस प्रकार से रक्त बहना भी तो एक प्रकार से रक्तपात ही है। अतः वह सोचने लगा कि क्यों ना कोई ऐसी युक्ति खोजी जाए जो कैदियों को इस समस्या से निजात दिला सके। बहुत सोच-विचार के बाद उसने लकडी की एक खपची ढूंढ़ी, रंगबिरंगे बाल एकत्रित किए तथा अपनी कल्पनाशक्ति से खपच्ची को छिलकर बढ़िया आकार दिया तथा अगले उसके अगले हिस्से पर महीन सुराख कर दिया। जहां-तहां से गोंद इकट्ठा कर उस सुराख में कांट-छांट कर बराबर किए महीन बालों को फिट कर गोंद द्वारा सुराख में जमा दिया। इस तरह उसने काले-उजले बालों का सम्मिलित कूचोंवाला साधारण अनाकर्षक दांत मांजने का ब्रश तैयार किया।

कैदियों द्वारा इसके सफल प्रयोग किए जाने के बाद से यह नित्य अपने इस ब्रश को तैयार करने में समय देने लगा। जेल से रिहा होने के बीच के दो वर्षों में उसने तमाम कैदियों को यह ब्रश उपहारस्वरुप देने और इसके निर्माण में लगाया। जेल से रिहा होने पर वह इस काले-उजले बालों की सम्मिलित कूंचीवाला ब्रश आम लोगों को वितरित करता हुआ वारविकशायर लौटा। वहां भी साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए उसने काले-सफेद बालों की कूंचीवाला ब्रश आमजन को भेंटकर इसी कूंची की तरह गूंथकर रहने की शिक्षा देने लगा। रंग, भाषा  और जातिगत भेद पाटने के कारण वह संत एडीसन के नाम से विख्यात हुआ। उसके द्वारा आविष्कृत यह ब्रश तमाम तब्दीलियों के बावजूद आज भी हर धर्म, भाषा और सम्प्रदाय के लोग बेहिचक स्वीकार कर रहे हैं। यही इसकी सफलता है कि, हर सुबह यह विभिन्न रंग के बालों वाला टूथब्रश मानवता का पाठ पढ़ाने के काम में बिना किसी भेदभाव के जुट कर पूरे विश्व को एकता का पाठ पढ़ाते हुए विभिन्नता को स्वीकारने का संदेश देता है। पूरा विश्व 26 जून को टूथब्रश डे रुप के मनाता है।

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