Friday, 25 May 2018

अनन्यसाधारण है कल्पवृक्ष आम - शिरीष सप्रे

अनन्यसाधारण है कल्पवृक्ष आम
शिरीष सप्रे

सभी फलों के राजा का सर्वत्र महत्व है और इसे पवित्र अमृत फल माना जाता है। आम देवताओं के बगीचे का फल है। लोकपरंपरा में जनभावनाओं में आम देवताओं का वृक्ष होने के कारण और इसकी पवित्रता के कारण किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत आम के पत्तों के तोरण से ही होती है। कोई सी भी पूजा हो द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगने के पश्चात ही त्यौहार या शुभ कार्य की शुरुआत होती है। फिर वह भगवान सत्यनारायण की पूजा ही क्यों ना हो? आम के पत्तों की माला दरवाजे पर टांगी नहीं कि मानो सारा मांगल्य द्वार पर अवतरित हो जाता है। शुभ कार्यों में जल से भरे कलश का महात्म्य और उसमें आम के पत्ते होना ही चाहिए। कलश पूजन भारतीय संस्कृति का अग्रगण्य प्रतीक है। पुराणों के अनुसार नारदमुनि शिवजी के विवाह के अवसर पर इस वृक्ष को स्वर्ग की वाटिका से लाए थे। बौद्ध और जैन मत में भी आम को शुभ वृक्ष मानते हैं। जातक कथाओं में भी आम का वर्णन मिलता है। 

दीर्घकाल तक प्रसन्नता से भरा हराकच्च रंग रखनेवाले आम के पत्ते सहज ही सुखद ठंडक दे जाते हैं। विवाह प्रसंग पर मंडप के द्वार पर आम के पत्तों के तोरण का कोई विकल्प नहीं। अमृत फल के रुप में प्रसिद्ध आम फिर वह कच्चा हो या पका हुआ का सर्वत्र कौतुक होता है। प्रत्येक को ही चाहिए ऐसा यह फल देवताओं का फल यानी आम ही है। शायद ही कोई हो जिसे यह फल पसंद ना हो। गर्मी के दिनों में इसका रस और कैरी का पना अतिथियों की आवाभगत कैसे करें की चिंता तत्काल दूर कर देता है। 

वैसे तो अक्षय तृतीया से बाजार में आम आना शुरु हो जाते हैं। भले ही महंगे क्यों ना हों परंतु घरों में आम आना शुरु हो ही जाते हैं। जेठ के महिने में वटसावित्री पूर्णिमा पर सुहागिनें अपने पति के जीवन के लिए मन ही मन वटवृक्ष की पूजा अवश्य करती हैं। इस पूजा में मान भले ही वटवृक्ष का हो परंतु आम के पत्तों के बिना काम नहीं चलता। 'गंगा दशहरा" के लिए देवताओं, गंगा और पंडितों को कम से कम 10 आम तो भी दान करने का महत्व है और वह किया भी जाता है। आम कभी निष्पर्ण नहीं होता। यह दीर्घायु वृक्ष है। वैवाहिक जीवन भी इसी तरह से फले फूले इस भावना से विवाह प्रसंग पर आम का महत्व है। आम संततीदायी है। पुत्रप्राप्ति के लिए वृक्ष की पूजा की जाती हैै। महान विभूति या सत्पुरुष पुत्र हो इसके लिए स्त्री के आंचल में आम प्रसाद के रुप में देते हैं। प्रजोत्पादक माने जाने के कारण विवाह  की विधियों के समय आम को पूजा में स्थान मिला है।

आम ऐसा फल है जो परंपरागत शत्रु भारत और पाकिस्तान दोनो का ही राष्ट्रीय फल है। बांग्लादेश का राष्ट्रीय वृक्ष तो फिलीपाइन्स का राष्ट्रचिंह है। वैसे तो इसका उद्‌गम अज्ञात है फिर भी यह फल है तो एशिया का ही, ऐसा माना जाता है। भारत ही नहीं तो दक्षिण एशिया की संस्कृति में भी आम को विशेष स्थान प्राप्त है। भारत में आम की अनेक प्रजातियां लगभग 200 हैं, हापुस, तोतापुरी, बादाम, लंगडा, दशहरी, केशर, पायरी, गोला, नीलम, आदि। आयुर्वेद में आम का बहुत महत्व है। आम्रमंजिरी कामदेव के पांच बाणों में से एक है। महाकवि कालीदास के साहित्य में अमराई और कोकिला के कुंजन के वर्णन हैं। आम को आनेवाली पहली आम्रमंजिरी पहिली शिवरात्रि को शिवजी को अर्पित करने की प्रथा है।

फलों का राजा अपने खट्टे-मीठे और रसदार गुणधर्म के कारण बच्चों से लेकर बुढ़ों तक में लोकप्रिय है। यह अपने कई औषधीय गुणों के कारण भी जाना जाता है। कच्चा हो या पका आम अनेक औषधीय गुणों से भरपूर है। कच्चा आम केरी आम्लधर्मी स्तंभक होकर इसका छिलका कषायात्मक और उत्तेजक होता है। पका हुआ आम मधुर, स्निग्ध, सुखदायक, बलदायक पचने में थोडा भारी, वायुहारक, शरीर की कांति और जठाराग्नि को बढ़ानेवाला होता है। यह कैल्शियम, लोहा, फॉस्फोरस, विटामीन के, फायबर, प्रोटीन आदि से युक्त होता है। आम का सेवन वजन बढ़ाने में सहायक होता है। इसके सेवन से बुद्धि एवं दृष्टि तीव्र होती है। एनिमिया या रक्ताल्पता से बचाव होता है। क्योंकि, इसमें तांबा की मात्रा भी भरपूर होती है। तांबा शरीर में लाल रक्तपेशियां बढ़ाने में सहायता प्रदान करता है। ब्लडप्रेशर और डायबिटीज नियंत्रित करने में आम के पत्ते उपयोगी होते हैं। बालों के लिए आम की गुठली के तेल को उपयोग में लाते हैं। आम की गुठली में विटामिन और खनिज भरपूर मात्रा में होते हैं। अंत में आम के संबंध में यह जो कहावत है कि आम तो आम गुठलियों के दाम निश्चय ही बडी सटीक बैठती है। 

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