Friday, 11 May 2018

ग्रीष्मकाल में वरदान हैं तरबूज - शिरीष सप्रे

ग्रीष्मकाल में वरदान हैं तरबूज 
शिरीष सप्रे

हमारा शरीर तंदरुस्त और शक्तिशाली बना रहे इसकी व्यवस्था प्रकृति ने स्वयं ही कर रखी है बस आवश्यकता है तो हमें इस संबंध में व्यवस्थित जानकारी रखने की। अब ग्रीष्मकाल में होनेवाली गर्मी के प्रकोप को ही लीजिए इससे बचाने के लिए प्रकृति ने हमें तरबूज और खरबूज जैसे फल दिए हैं। यह प्रकृति की अनुपम कृपा ही है कि बहुउपयोगी, बहुगुणी स्वादिष्ट ये फल हमें खाने को मिलते हैं। तरबूज  को ही लीजिए जहां यह गरीबों के लिए सस्ता फल है वहीं अमीरों के लिए विभिन्न प्रकार से खाया जानेवाला एक स्वादिष्ट फल है। वर्गीकरण की दृष्टि से यह कद्दूवर्गीय फल है। कच्चे तरबूज की लोग सब्जी, रायता आदि बनाते हैं। इसके बीज की गिरियों को विभिन्न प्रकार के मेवा मिष्ठानों में डालते हैं। बीजों से तेल भी निकलता है।
तरबूज ग्रीष्मकालीन फसल है। जितनी तेज गर्मी होगी उतनी ही इसकी पौध एवं फसल में वृद्धि होगी। तरबूज की खेती के लिए सबसे उपयुक्त नदी के किनारे की रेतीली जमीन होती है। प्रकृति की अनमोल देन तरबूज ग्रीष्मकालीन विशेष फल है। तरबूज का सर्वाधिक उत्पादन चीन में किया जाता है। जापान में चौकोन तरबूजों का उत्पादन किया जाता है। तरबूज या वाटर मेलन अफ्रीका से आकर सारी दुनिया में खाया जाने लगा। इसके सफेद हिस्से की सब्जी बनाकर खाई जाती है। ठंडक प्रदान करनेवाला यह फल अत्यंत शीत होकर बढ़िया टानिक है। आयुर्वेद के कई ग्रंथों में इसके गुणों की चर्चा है। आयुर्वेद के अनुसार यह ग्राही, आंख की रोशनी बढ़ानेवाला, शीतलता प्रदान करनेवाला, भारी तथा वात-कफनाशक और प्यास को शांत करनेवाला कहा गया है। गर्मी के दिनों में अधिक पसीना निकलने के कारण प्राकृतिक लवणों की कमी हो जाती है और प्यास अधिक लगती है। तरबूज खाने से प्यास शांत होती है और उपर्युक्त लवणों की पूर्ति होती है।

आधुनिक खोजों मेें इसे चर्म रोगों, पेचिश, कब्ज, आंतों की जलन, जी मिचलाना, उल्टी, पीलिया, लीवर-तिल्ली, उच्च रक्तचाप, पेशाब में जलन या पेशाब रुकने, आदि रोगों में उपयोगी पाया गया है। यह फेफडे के रोगों पर भी लाभप्रद पाया गया है। गर्मी के मौसम में तरबूज का शर्बत अत्यंत लाभप्रद है।

No comments:

Post a Comment