Friday, 9 September 2016

अंतरराष्ट्रीय जगत की पहली भारतीय सितारा सुंदरी - पर्सिस खंबाटा

पिछले कुछ महिनों से भू. पू. मिस इंडिया और भारतीय सिने जगत की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री प्रियंका चोपडा अपनी हॉलीवुड संबंधी गतिविधियों और उस संबंध में छपनेवाले समाचारों के कारण सतत सुर्खियों में बनी हुई है और शायद ही कोई सप्ताह ऐसा जाता हो जब उसके संबंध में कोई समाचार ना छपता हो। हाल ही में छपे समाचारों के अनुसार वह छः बॉलीवुड फिल्मों को रिजेक्ट कर अंतरराष्ट्रीय फैशन रीयलटी शो 'प्रोजेक्ट रनवे" से जुडकर फिर चर्चा में है। इससे पूर्व वह हॉलीवुड फिल्म 'बेवॉच"में खलनायिका के रुप में हिस्सा बन और टेलीविजन शो 'क्वांटिको" में नजर आने के कारण एवं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल के साथ व्हाइट हॉउस में डिनर कर प्रसिद्धी हासिल कर ही चूकी हैं। अब उन्होंने समाचार पत्रों में 'क्वांटिको सीजन 2" का पोस्टर जारी किया है। विदेशी पत्रिकाओं में उनके साक्षात्कार छप रहे हैं।

इस मामले में प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय बेडमिंटन खिलाडी प्रकाश पदुकाण की बेटी मशहूर तारिका दीपिका पदुकोण भी कुछ कम पीछे नहीं उसने भी हॉलीवुड की हिट 'फॉस्ट एंड फ्यूरियस" फिल्म जिसके अभी तक छः भाग बन चूके हैं के हीरो वीन डीजल के साथ 'ट्रिपल एक्स - द रिटर्न ऑफ जेंडर केज" में काम कर रही हैं। दीपिका का कहना है कि भू. पू. मिस इंडिया ऐश्वर्या राय मार्गदर्शक के रुप में भारत को ग्लोबल मेप में लेकर आई और पिछले कुछ वर्षों से कॉन फिल्म फेस्टीवल की एक प्रमुख सेलेब्रिटी बनी हुई हैं। ऐश्वर्या राय ने 'ब्राईड एंड प्रेजुडिस" और 'पिंक पैंथर 2" मे भी काम कर चूकी हैं। हॉलीवुड की इस दौड में शामिल होने की उम्मीद आलिया भट्ट जैसी प्रतिभा भी लगाए बैठी है।

इन भारतीय सुंदरियों के अलावा भारतीय सिनेजगत के अनेक कलाकार हॉलीवुड में जगमगा चूके हैं। यह बात अलग है कि जो प्रसिद्धि और चर्चा में रहने का अवसर प्रियंका और दीपिका को मिल रहा है वैसा अन्य भारतीय कलाकारों को नहीं मिला है यह सच है। इस मामले में नसीरुद्दीन शाह का यह कहना भी सच हो सकता है कि यह मीडिया मेनेजमेंट है जो उन्हें नहीं आया नहीं तो हॉलीवुड में उन्होंने इनसे अधिक ही काम किया है। अनिल कपूर ने भी हॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता टॉमक्रूज के साथ अत्यंत सफल फिल्मों की श्रंखला 'इंपोसिबल मिशन" के चौथे भाग 'घोस्ट प्रोटोकोल" में एक पात्र निभाया था। किसी जमाने में कबीर बेदी भी विदेशी फिल्मों में काम कर चूके हैं। वे इटली में बडे प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय थे इसका कारण उनका टेलीविजन शो 'सॅडोकोन" था। इरफान खान भी सफल  फिल्मों 'लाइफ ऑफ पाइ" और ज्यूरासिक पार्क जैसी फिल्मों में महत्वपूर्ण रोल निभा चूके हैं। अमरीश पूरी ने तो हैरिसन फोर्ड जैसे बडे कलाकार के साथ स्पिलबर्ग की फिल्म "इंडियाना जोन्स एंड टेंपल ऑफ डूमडूम" में दर्शकों को भयकंपित कर देनेवाले पात्र के रुप में काम कर बहुत नाम कमाया था।
जो भी हो लेकिन यह जो हमेशा कहा जाता है कि लोगों की स्मरण शक्ति बडी कमजोर होती है बिल्कूल सच है वरना आज पर्सिस खंबाटा की याद में यह लेख ना लिखना पडता। पर्सिस खंबाटा जो 1965 में 'मिस इंडिया" बनी थी। विदेश जानेवाली अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहली भारतीय सुंदरी मॉडल थी। वह कई मामलों में अद्‌भुत थी 1960 के दशक में जब गोरी चमडी के बगैर कोई अवसर प्राप्त होना अत्यंत कठिन था और नारीवाद का भी जोर नहीं था तब इन रंगभेदी गोरों के बीच उसने एक मुकाम हासिल किया था जो निश्चय ही गर्व का विषय है। परंतु, उस जमाने में किसीको नहीं लगा कि उस पर इस बात के लिए गर्व किया जाना चाहिए। आज तो वह विस्मृत सी ही हो चूकी है। अभी भी गोरों के देश में रंगभेद किया जाता है बीते दिनों छपे समाचार के अनुसार वहां 46 प्रतिशत लोग रंगभेदी हैं। कुछ ही समय पूर्व अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी टीवी शो बिग ब्रदर में इसका शिकार हो चूकी है।

शायद यह सब दृष्टि में रखकर ही नसीरुद्दीन शाह ने कहा था कि ः यह सब जल्द लौटेंगे हॉलीवुड के पास एशियन स्टार्स के लिए जगह नहीं है। अनिल कपूर ने कहा यह कुछ भी नहीं है। बात सही भी है भले ही कई बॉलीवुड के कई कलाकारों ने हॉलीवुड में काम हासिल कर स्वयं के अंतरराष्ट्रीय होने का तमगा प्राप्त कर लिया हो परंतु, अभिनय करने का संतोष तो शायद ही कोई हासिल कर पाया हो। हां, वहां अपन उपेक्षित थे इसका अंदाजा अवश्य उन्हें लग ही गया होगा। लेकिन हॉलीवुड में चेहरा दिखाने की लालसा इतनी अधिक प्रबल है कि हमारे बॉलीवुड के कलाकारों की अमिताभ बच्चन जैसे महान कलाकार भी 'द ग्रेट गेट्‌स बी" में पांच मिनिट के लिए अपना चेहरा दिखाकर गदगद हो गए।

ऐसे में व्यवसायिकता की दृष्टि से भले ही यह कहा जा सकता है कि पर्सिस ने गलत समय चुना था लेकिन फिर भी यह उतना ही सच है कि उसने अपना एक स्थान बनाया था। पर्सिस खंबाटा की इस वर्णभेद की लडाई में उसने इंग्लैंड-अमेरिका में जो मुकाम हासिल किया, उसमें जो प्रतिभा थी, उसकी कदर की दिलीप कुमार ने। लंदन में एक कार्यक्रम में जहां दिलीप कुमार लता मंगेशकर के साथ प्रमुख अतिथि के रुप में गए थे तब वहां उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि यहां एक ऐसी लडकी मौजूद है जिसका मैं सम्मान करना चाहता हूं और वह है पर्सिस खंबाटा, उसका स्थान है यहां हमारे टेबल पर। 

पर्सिस खंबाटा को जबरदस्त ब्रेक मिला था हॉलीवुड मूव्ही 'स्टार ट्रेक" में लेफ्टनंट इलिया के पात्र के रुप में इसके लिए उसने अपना सिर मुंडवाया था। स्टार ट्रेक के रोल के लिए पर्सिस को सेटर्न अवार्ड के लिए चुना गया था। पर्सिस ने 'रॉकी" और 'रेम्बो" फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता सिल्व्हेस्टर स्टेलॉन और सिडनी पॉटिए (ऑस्कर विजेता एक बहामी-अमेरिकन एक्टर) जिसका दिलीप कुमार भी बडा सम्मान करते थे के साथ भी हॉलीवुड की फिल्मों में काम किया था। आज बीच-बीच में प्रियंका चोपडा की बांड गर्ल बनने की खबरें छपती रहती हैं लेकिन पर्सिस को तो जेम्स बांड की फिल्म ऑक्टोपूसी (1983) जिसमें कबीर बेदी और प्रसिद्ध टेनिस खिलाडी विजय अमृतराज ने भी काम किया था (इसकी शूटिंग भारत के जयपुर में भी की गई थी) के साथ टाइटल रोल में लिया गया था। परंतु, अचानक अपरिहार्य कारणों से यह हो न सका और उसके स्थान पर माउड ऍडम्स को लेना पडा था।

13 वर्ष की आयु मेें ही वह रेक्सोना साबुन के मॉडल के रुप में सामने आई और फिर एयर इंडिया, रेवलॉन जैसी अमेरिकन मल्टीनेशनल कंपनी और प्रसिद्ध गार्डन वरेली के लिए मॉडलिंग की। 1967 में वह ख्वाजा अहमद अब्बास की रहस्य-रोमांच से भरी अपराध फिल्म 'बम्बई रात की बांहों में" हीरोइन बनी थी। परंतु, मुंबई में सिव्हिक सेंस और प्रोफेशनलिज्म की कमी महसूस होने के कारण परेशान होकर लंदन चली गई। जब वह 1965 में मिस यूनिव्हर्स के लिए अमेरिका के मियामी में चुनी गई तब वहां की प्रेस ने लिखा था - अतिसुंदर भारतीय लडकी जो बरसों बाद अमेरिका में देखने में आई है। वह कई अमेरिकन टीव्ही सीरियलों में नजर आई। पर्सिस पहली भारतीय अभिनेत्री थी जिसे 1980 में एकेडमिक अवार्ड प्रेजेन्टेशन के लिए चुना गया था। इसी प्रकार से 52वे वार्षिक अकादमी पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र, लघु विषयों के ऑस्कर अवार्ड की वह सह-प्रस्तुता थी।

स्वदेश प्रेम के कारण वह साल में एक बार तो भी भारत अवश्य आती थी। उसकी तीव्र इच्छा थी कि उसे भारत में भी मान्यता मिले। परंतु, उसके नसीब में यह नहीं था। एक बार जब वह 1972-73 में भारत आई थी तब उसने उस समय के नामी फोटोग्राफर अश्विन गाथा के साथ लक्ष्मी-विष्णू के फोटो निकाले थे और लिंटास जैसी नामी एडवरटाइजिंग कंपनी जिसके 'क्लोज-अप" की मुस्कान और 'सर्फ की खरीदारी में ही समझदारी है - ललिताजी" के विज्ञापन तो आपको याद ही होंगे से प्रतिघंटा 1000 रुपया लिया था। उस जमाने के हिसाब से तो यह राशि प्रचंड ही थी। विभिन्न वेशभूषाओं में लिए गए उसके फोटोशूट लगभग 7 घंटे चले थे।

उसने जो कुछ हासिल किया अपने कर्तृत्व से हासिल किया, जो मुकाम हासिल किया वह उसके परिश्रम का फल था पर अंततः थककर वह हार गई और भारत वापिस आ गई और 'मिस इंडिया" की स्पर्धा पर एक सुंदर पुस्तक लिखी 'प्राईड ऑफ इंडिया" इसमें विजेता लडकियों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीती लडकियों के उल्लेख थे। इस पुस्तक के लिए उसने बडी लगन के साथ कठिन परिश्रम किया था परंतु, भू.पू. विजेता लडकियों से बहुत ही कम सहयोग मिला। परंतु, उसने पुस्तक प्रकाशित कर ही दिखाई। आज भले ही उसे कोई याद नहीं कर रहा है परंतु, वह अव्वल थी जिसके कारण भारतीय मॉडल्स-अभिनेत्रियों का नाम अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमका। यह पर्सिस की ही बनाई हुई परंपरा जो आगे चलकर विकसित हुई और उसके बाद कई मॉडल्स अंतरराष्ट्रीय जगत के पुरस्कार जीतने लगे।