Sunday, 19 June 2016

क्या भगवान हैं? 1

स्वामी ऐश्वर्यानन्द सरस्वती


भगवान की पूजा सब धर्मों के अनुसार, मुख्य रुप से हिंदूधर्मानुसार हर व्यक्ति को प्रतिदिन करना चाहिए। हमारे लिए कुछ पर्व विशेष होते हैं, उस पर्व पर ईश्वर पूजा विस्तार से की जाती है। इस प्रकार ईश्वर पूजा भक्त के लिए स्वाभाविक हो जाती है। जब हम नियमित रुप से पूजा करते हैं तो कभी-कभी हमारे मन में वह मूलभूत संदेह आ जाता है कि 'भगवान है या नहीं?" किसी भी विचारवान व्यक्ति के मन में यह संदेह आ सकता है कि 'मैं नियमित रुप से भगवान की पूजा करता हूं, परंतु क्या सचमुच भगवान है?" और जब भी ऐसा संदेह मन में आता है तो हमें बडा दुःख होता है। क्योंकि, हमें भगवान के बारे में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए। किंतु, पूर्ण श्रद्धा के होते हुए भी विचारवानों के मन में यह संदेह जागृत होना स्वाभाविक है। और यदि हम अपने आप इस प्रकार के संदेहों को जागृत नहीं करेंगे तो भी दूसरे लोग हैं जो आपके मन में संदेह उत्पन्न कर सकते हैं।


यदि कोई आप से पूछे कि 'क्या भगवान सचमुच है? क्या हमें अंधश्रद्धा से युक्त होकर या किसी के प्रश्न को अनदेखा करते हुए यह मानना चाहिए कि भगवान हैं या हमारे पास भगवान के अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए कोई सबूत है? कोई प्रमाण या ठोस उत्तर है? वैज्ञानिक प्रमाण हो या धार्मिक प्रमाण हो अथवा तार्किक प्रमाण हो, क्या कोई ऐसा प्रमाण हमारे पास है? यद्यपि हम स्वयं इस प्रश्न को उत्पन्न करें फिर भी यदि कोई दूसरा व्यक्ति हम से पूछे तो, हम क्या उत्तर देंगे?


इस प्रश्न के ऊपर बहुत से लोग विचार करते हैं, क्योंकि यह प्रश्न केवल अपने हिंदू धर्म में ही है ऐसी बात नहीं है। मुस्लिम हों या ईसाई या हिंदू हों सब लोग भगवान को मानते हैं, इसलिए सब इस प्रश्न पर विचार करते हैं। (यद्यपि बहुत से लोगों ने इस प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास किया है। किंतु, इस विषय में वे लोग एवं अन्य लोग उलझते ही जा रहे हैं, अर्थात्‌ यह प्रश्न क्लिष्ट होता जा रहा है।


कुछ दिनों पहले मैंने एक इंग्लिश लेखक की पुस्तक पढ़ी। वह व्यवसाय से स्ट्रक्चरल इंजीनिअर होकर उसने धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया हुआ है। उसने एक पुस्तक लिखी 'बियांड रिजनेबल डाऊट्‌स" पूरी पुस्तक में वह इसी विषय पर लिखता है और उस पुस्तक को पढ़कर मुझे बहुत से डाऊट आए, जो कि पहले से दोगुने हो गए।.....क्रमशः

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