Sunday, 8 November 2015

दीपोत्सव - एक अंतरराष्ट्रीय पर्व

दीपोत्सव - एक अंतरराष्ट्रीय पर्व


भारत में ही नहीं संसार के अनेक देशों में भी दीपावली का पर्व विभिन्न नामों और रुपों में मनाया जाता है। वर्तमान में चीन अपने आर्थिक संकट के कारण बडी चर्चा में है। वहां भी दीप पर्व बडे उत्साह के साथ मनाया जाता है और उसका अपना इतिहास है तथा उसे 'श्वान श्याओच्ये" कहा जाता है। चीन में दीपोत्सव ई. पू. हान राजवंश (ई.पू. 202 से सन्‌ 258) के काल से ही मनाया जाता रहा है। दरवाजों पर 'मेन-शेन" (द्वार देवता) के चित्र अंकित रहते हैं। यह परंपरा तांग राजवंश के सम्राट ताइत्सुंग (सन्‌ 627 से 649ई.) के काल से आरंभ हुई। इसके सातसौ वर्ष पश्चात मिंग राजवंश (सन्‌ 1368 से 1644) के काल में 'नईन हुआ" के चित्र चिपकाए जाने लगे जो मांगलिक माने जाते हैं। दरवाजों पर शुभ-लाभ, धन-धान्य बढ़े, दीर्घजीवी हों जैसे स्वस्ति वाचक शब्द अंकित रहते हैं। यह पर्व तीन दिन तक मनाया जाता है और इसे राजकीय तौर पर भी बडी धूमधाम से मनाया जाता है। तीन दिन की सरकारी छुट्टियां रहती हैं। द्वीपो के देश जापान में दीवाली 'तोरोनागाशी" के रुप में घर-घर दीप (लालटेन के रुप में) जलाकर तीन दिन तक मनाई जाती है। जापानियों का विश्वास है कि इस दिन उनके पूर्वज घर आकर उन्हें आशीर्वाद प्रदान करते हैं। अतः दीप जलाकर वे पितरों का मार्गदर्शन करते हैं।


सुमात्रा, बाली, जावा, फिजी, मारीशस, त्रिनिनाड, सूरीनाम, ब्रिटिश गुयाना आदि देशों में जहां प्रवासी भारतीयों का बाहुल्य है यह पर्व भारत के समान ही मनाया जाता है। भारत के पडौसी देश श्रीलंका में दीपावली राष्ट्रीय त्यौहार है। दीपक को लक्ष्मी मानकर पूजन किया जाता है। नेपाल में भारत के समान ही पांच दिन तक दीपावली मनाई जाती है। दीप जला भगवती की पूजा की जाती है। म्यांमार (ब्रह्मदेश या बर्मा) में प्रकाश पर्व का नाम तंडीजू है। बर्मा का प्रत्येक घर दीपों के प्रकाश से जगमगा उठता है। रंग-बिरंगी बंदनवार बांधी जाती है, आतिशबाजी की जाती है, भांति-भांति के कंडील लगाए जाते हैं। वहां पर दीपावली इस मान्यता के साथ मनाई जाती है कि भगवान बुद्ध इसी दिन ज्ञान प्राप्त कर पृथ्वी पर उतरे थे।


थाईलैंड में दीपावली को क्रेथोंग के नाम से पुकारते हैं। इस दिन वहां के निवासी अपने-अपने घरों को और विशेष रुप से मंदिरों को दीपों से प्रकाशित करते हैं तथा पत्तों के बने दीपकों को झीलों-नदियों में प्रवाहित करते हैं, बच्चे आतिशबाजी करते हैं। जलदेवी को प्रसन्न करने के लिए यह उत्सव मनाया जाता है। इजिप्त में तीन दिनों तक मनाया जानेवाला प्रकाश पर्व बहुत पुराना त्यौहार है। मिस्त्र के शासक फरोह बादशाह अपने को सूर्यवंशी कहते थे। अतः धरती पर सूर्य को उतारने के लिए हर वर्ष तीन दिन तक प्रकाश पर्व मनाते थे। रात में दीपों से प्रकाशित नौकाएं नील नदी के वक्ष पर तैरती थी। इजराईल में हनुकाह के नाम से प्रकाशोत्सव मनाया जाता है। यहूदी कैलेंडर के नवें माह में आठ दिन तक मोमबत्ती का प्रकाश करते हैं। 2100 वर्ष पूर्व सीरायाई सेना पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।


उपर्युक्त सब बातें दीपोत्सव की विश्वव्यापकता पर प्रकाश डालती हैं। भारत में तो विभिन्न कारणों से यह दीपमालिका पर्व इतने बडे स्तर पर मनाया जाता है कि इसे सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय पर्व ही कह सकते हैं।

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