Friday, 24 January 2014

तिरंगे ध्वज के तीन रंग

तिरंगा ध्वज के तीन रंगों का अर्थ सांकेतिक है। वे योग्य हैं। धार्मिक दृष्टि से हरा रंग मुसलमानों को अपना लगनेवाला है। तो, हिंदुओं के हाथ की फूलों की डलिया - लाल सुर्ख पुष्प, हरी दूब या दूर्वा, तुलसी, बेल और शुभ्र जूही के फूलों से भरी हुई होती है। अतः उसे कोईसा भी रंग पराया नहीं लगता. शुभ्र रंग तो समता का द्योतक है। अतः रंग के विषय में मतभेद नहीं। 
- (1928 हिंदूसमाज संरक्षक स्वातंत्र्यवीर सावरकर) (रत्नागिरी पर्व) - सावरकर बालाराव 

वर्तमान में अनायास जो राष्ट्रीय ध्वज बनने जा रहा है, उसमें व्यत्यय ना लाएं इस बुद्धि से और वर्तमान के रंगों का समुच्चय यह राष्ट्रीय ध्येय उत्तम प्रकार से व्यक्त करने में समर्थ होने के कारण हम इन रंगों को सहमति दे रहे हैं। अंत में यह भी ध्यान में रखना चाहिए कोई से भी रंग लिए तो भी उसमें इस तिंरगे के समान यह नहीं तो वह ऐसी कुछ न्यूनता रहेगी ही. वह न्यूनता इस तिरंगे में कुलमिलाकर बहुत ही अल्प है। यही उसका विशिष्ट समर्थ है। - (1928 श्रद्धानंद 2 अगस्त)

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