Thursday, 16 January 2014

बीट - चुकंदर - वानस्पतिक नाम बीटा वल्गेरिस

बीट - चुकंदर - वानस्पतिक नाम बीटा वल्गेरिस


प्राचीन रोमन और ग्रीक इसका प्रचुर मात्रा में प्रयोग करते थे। यह एक रसीली कंदमूल वनस्पति है। भारत में इसकी दो प्रजातियां पाई जाती हैं,लाल जामुनी और सफेद। इसका आहार में उपयोग पिछले 2000 सालों से हो रहा है। यह मध्य यूरोप और पश्चिमी एशिया मूल की वनस्पति है। भारत में इसकी खेती पौष्टिक खाद्य पदार्थ के रुप में की जाती है। इसमें शकर के रुप में कार्बोहायड्रेट्‌स (कार्बोदक), अल्प मात्रा में प्रोटीन (प्रथिन) और फेट्‌स (चिकनाई) रहते हैं। इसका उपयोग ज्यादतर सलाद, अचार और चटनी के रुप में किया जाता है। इसकी पत्तियों की सब्जी भी बनती है। यह प्राकृतिक शकर का अच्छा स्त्रोत है। इसमें सोडियम, पोटेशियम, फास्फोरस, केल्शियम, सल्फर, क्लोरिन, आयोडिन, आयरन, कॉपर, विटामिन बी1, बी2, नायसिन, बी6, सी और पी। इसका रस पाचक कार्बोहायड्रेट्‌स से युक्त परंतु, कम केलोरी वाला होता है। इसमें अच्छी गुणवत्ता और मात्रा में अमीनो एसिड होता है। विदेशों में इसके रस का व्यापक उपयोग होता है। यह रक्त को शीतलता प्रदान करता है।


तत्त्वों का पृथक्करण


खाद्य मूल्य खनिज और विटामिन
पानी 87.7% केल्शियम 18 मि. ग्रा.
प्रोटिन 1.7% फास्फेट 55 मि. ग्रा.
चिकनाई 0.1% आयरन 1 मि. ग्रा.
खनिज 0.8% विटामिन सी 10 मि. ग्रा. अच्छी मात्रा में विटामिन ए, बी और अल्प मात्रा में बी कॉम्पलेक्स और ऊर्जा मूल्य 43
रेशा 0.9%
कार्बोहायड्रेट्‌स 8.8%


प्राकृतिक लाभ और औषधीय गुणधर्म


चुकुंदर गुरु, स्निग्ध, शीतल, पौष्टिक, पित्तनाशक, रक्तवर्धक शरीर को लाली प्रदान करनेवाला और शक्तिप्रद है। चुकंदर में बेटिन नामका एक तत्त्व है जो किडनी, गाल ब्लेडर, जठर और आंतों को स्वच्छ रखने में सहायता करता है।


1). रक्ताल्पता - इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में रहता है जिसके कारण लाल रक्त कणों की वृद्धि होती है। बच्चों की रक्ताल्पता और जहां अन्य उपाय काम न आए हों वहां बीट का रस शरीर की मजबूती एवं रक्ताल्पता को दूर करता है।


2). पाचन के विकार - बीट का रस पीलिया - जॉंडिस, जी मिचलाना, उल्टी - दस्त आदि में लाभदायक रहता है। बीट के रस में एक चम्मच नींबू का रस मिलाने से इसके औषधी गुणों में वृद्धि होती है। सुबह नाश्ते के पूर्व बीट रस के साथ शहद का उपयोग गैस्ट्रीक अल्सर में फायदा पहुंचाता है। 'बीट का रस दिन में केवल एक बार लेना चाहिए।"


3). कब्ज और बवासीर - पुराने कब्ज और बवासीर में यह बहुमूल्य लाभ पहुंचाता है। इसका रेशा कब्ज दूर कर शौच के मार्ग को आसान बनाकर बवासीर में लाभदायक रहता है।


4). रक्त संचार प्रणाली के दोष - बीट का ज्यूस अकार्बनिक केल्शियम जमाव को रोकने के लिए एक अच्छे घोल का कार्य करता है। यह हायपर टेंशन, धमनियों के कडा होने, ह्रदय रोग आंतों के फूलने के रोगों के लिए एक महत्वपूर्ण उपचार है।


5). किडनी और पित्ताशय के विकार - ककडी, बीट और गाजर के रस का मिश्रण किडनी और पित्ताशय की सफाई के काम आता है। यह इन दोनो ही अंगों के विकारों के लिए बहुउपयोगी है।


6). चर्मरोग - बीट का कंद पत्तियों का उबला हुआ जल चर्मरोगों - फोडों - फुंसियों और मुंहासों पर लगाने से लाभ होता है।


7). फरास - जुंएं - बीट के पत्तों को पानी में उबालकर सिर धोने से फरास दूर होती है और जुंएं मर जाती हैं।


8). बालों का गिरना - चुकंदर के पत्तों को मेहंदी के पत्तों के साथ पीसकर सिर पर लेप करने से बाल गिरना बंद होकर और तेजी से बढ़ते हैं।


9). जोडों का दर्द - इसके खाने से जोडों के दर्द में लाभ होता है।


10). ट्यूमर - बीट और गाजर का रस लाभदायी है।


11). मासिकधर्म, श्वेत प्रदर आदि स्त्री रोग - गाजर और बीट का रस लाभकारी।


12). केंसर - बीट के रस में केंसर निवारक गुण हैं।


बीट का रस निर्दोष और गुणकारी है, पौष्टिक होने के साथ ही यह रक्तशोधन करके शरीर को लाल सुर्ख बनाने में सहायता करता है। बीट रस के रोग निवारक गुणों के लाभ के लिए किसी रस चिकित्सा तज्ञ से सलाह और मार्गदर्शन से अधिक लाभ होगा।

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